धुंध
रह गयी थी रूह की प्यास बुझते बुझते,
जब तलक तेरे रूह-ए -सुकून को महसूस किया
चल पड़ी थी कुर्बान करने अपने अरमान,
जब तलक तेरे जूनून-ए-इश्क को महसूस किया
धुंधला रह गया था मंजिल का नज़ारा,
देखा करती है अब रुखसार-ए-साहिल आईने में
जाने क्यों उम्मीद की लो बुझे नहीं अभी तक,
जाने क्यों झूल रही है ज़िन्दगी मौत के मायने में
जब तलक तेरे रूह-ए -सुकून को महसूस किया
चल पड़ी थी कुर्बान करने अपने अरमान,
जब तलक तेरे जूनून-ए-इश्क को महसूस किया
धुंधला रह गया था मंजिल का नज़ारा,
देखा करती है अब रुखसार-ए-साहिल आईने में
जाने क्यों उम्मीद की लो बुझे नहीं अभी तक,
जाने क्यों झूल रही है ज़िन्दगी मौत के मायने में

jaise tu hamesha abstract likhata hai ...
ReplyDeletebut haan angareji humko palle nahi padati
haan hindi- urdu mein to ham ....
चल पड़ी थी कुर्बान करने अपने अरमान,
जब तलक तेरे जूनून-ए-इश्क को महसूस किया
lines are heart-throbbing
matlab dil tak utari hai ...