यूँ ही....

ना कल की है सोच
ना कल थी इसकी सोच
यूँही निभाते गए रिश्ते
यूँही लुटाते गए दुनिया

ना जाने कहाँ जाएँगे
ना जाना कहाँ जाएँगे
यूँही निभाते गए रिश्ते
यूँही लुटाते गए दुनिया

ना ही उभरे इस ज़िन्दगी से
ना ही डूबे इस मौत में
यूँही निभाते गए रिश्ते
यूँही लुटाते गए दुनिया

हार जीत का सिलसिला चलता ही रहा
जी चाहा किया, जी चाहा कहा
यूँही निभाते गए रिश्ते
यूँही लुटाते गए दुनिया

गुजरेंगे जन्नत से इस सफ़र में
गुज़रे थे जहन्नुम से इस सफ़र में
पलक झपकते ही रेगिस्तान हुआ
आँख खुली तो  गुलिस्तान हुआ

यूँही निभाते गए रिश्ते
यूँही लुटाते गए दुनिया

Comments

  1. Wah Wah!!!!!!!!!! Bilingual Shayar.... :P

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  2. Very nice Vamsi...luvd it :)
    goes perfectly wd ur happy-go-lucky and carefree image!!!

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  3. kya baat kya baat sir ji
    I liked these lines
    "पलक झपकते ही रेगिस्तान हुआ
    आँख खुली तो गुलिस्तान हुआ"
    Life ka change

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  4. Wah waa!!Wah waa...Very Nice...You are a true poet...nice work vamsi....Keep it up!!!

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  5. Shayar sahab...agalie shayari mein shayar bannane ke story bhi likhna. Great yar!!! :)

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